ईस्टर क्या है ? और इसे क्यों मनाया जाता है ? क्या ईस्टर मनाना उचित है ?
ईस्टर क्या है ? और इसे क्यों मनाया जाता है ? क्या ईस्टर मनाना उचित है ? क्या यह बाइबिल पर आधारित है ?और आज आपके सारे सवालों के जवाब आप इस संदेश से अच्छे से समझें l इसको यूनानी और लैटिन भाषा में पासका कहा जाता है जिसका मतलब होता है पुनरुत्थान का दिन क्योंकि उस दिन प्रभु यीशु मसीह मौत को हरा कर कब्र से बाहर निकल आए थे उनका पुनरुत्थान हुआ था इसलिए इस दिन को ईस्टर संडे या फिर पुनरुत्थान का दिन भी मनाया जाने लगा शुक्रवार को प्रभु यीशु मसीह को मारा गया था गाढ़ा गया था उनके हाथों में कीलें ठोंकी गई थी उन पर इंसानों ने थूका भी था और शारीरिक मृत्यु के बाद उसे कब्र में रख दिया गया था जैसे कि यहूदियों के रिवाज के अनुसार सभी को रखा जाता है और फिर प्रभु यीशु मसीह तीसरे दिन यानी कि रविवार को वहां जी उठे
और मृत्यु के बाद दोबारा जी उठने को ही पुनरुत्थान कहते हैं बहुत सारे लोग कहते हैं कि मनुष्य का मरना तो तय है और कोई भी मरकर जी नहीं उठता तो फिर यीशु मसीह ऐसे कैसे उठ गए जी हां मनुष्य का मरना तो तय है लेकिन परमेश्वर का मरना तय नहीं है और क्योंकि यीशु मसीह परमेश्वर है इसीलिए उन्होंने मृत्यु को भी मात दी l प्राचीन इतिहास की किताबों में फैल गई और कुछ लोगों ने यह स्वीकारा लेकिन यीशु की चर्चा चल रही थी भजन संहिता में पढ़ते हैं राजा दाऊद के द्वारा 14 साल
पहले भविष्यवाणी में बता दिया गया था शिव के हाथों और पैरों को छेड़ा जाएगा और उसकी मृत्यु के समय चारों तरफ से घेर लिया जाएगा जब राजा दाऊद ने भजन संहिता लिखी उस समय उसकी मृत्यु का नामोनिशान भी नहीं था और ना ही उस समय रोमी साम्राज्य था और हम जानते हैं कि क्रूस की
मृत्यु तो मात्र रोमी साम्राज्य में ही आई थी लेकिन परमेश्वर की महान योजना में पहले से ही ठहराया गया था कि यीशु को सूली पर चढ़ाया जाएगा एक दूसरी भविष्यवाणी में पढ़ते हैं येसया 53 अध्याय
के पांच वचन में 700 साल
पहले ही भविष्यवाणी कर दी गई थी कि वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया कुचला गया और हमारी ही शांति के लिए उस पर ताड़ना हुई उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए हैं और एक और भविष्यवाणी में यह भी बता दिया गया था कि वह मुर्दों में जी उठेगा यह अत्याचार करके और दोष लगाकर उसे ले गए उस समय के लोगों में से किसी ने भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया था मेरे ही अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी यहां भी पहले से ही भविष्यवाणी कर दी गई थी यीशु फिर दोबारा जी उठेगा और फिर दोबारा राजा दाऊद के द्वारा और भविष्यवाणी जिसमें लिखा था तू मेरे प्राण को अगलॉक में ना छोड़ेगा ने अपने पवित्र भक्तों को कब्र में सरने देगा यीशु अगलॉक में
नहीं रहे वह कब्र में नहीं रहे थे वे जी उठे चाहे आप 1400 साल
पहले की भविष्यवाणी देख लीजिए या फिर 700 साल
पहले की कोई भविष्यवाणी देख लिए या फिर आप यहूदियों इतिहास का जोसेफ इतिहास को देख लीजिए बिल्कुल साबित करती हैं कि यीशु का पुनरुत्थान बिल्कुल निश्चित था या पहले ही परमेश्वर की महान योजना का भाग था और पवित्र शास्त्र के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिए मरा गाढ़ा गया और पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार तीसरे दिन जीबित हो उठा और 500 से अधिक लोगों को दिखाई दिया जब पवित्र शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो वह पुराने नियम के बारे में लिखते हैं क्योंकि उस समय तो नया नियम लिखा भी नहीं गया था और जिन्हें यशु दिखाई दिया वह 500 से
ज्यादा लोग थे और यीशु 40 से
ज्यादा दिन अपने चेलों के साथ दोबारा जीतने के बाद भी रहा इन कारणों की वजह से इस बात को बिल्कुल भी झूठा नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि मसीहो के पास पूरे पूरे सबूत है इस बात को सपोर्ट करने के लिए दोस्तों के द्वारा आशा और साहस मिलता है कि जो मुर्दों में जी उठा वैसे ही हम भी उसके साथ जी उठेंगेहो प्रेरित पौलुस जैसे
मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई वैसे ही मसीह के द्वारा मरे हुए का पुनरुत्थान भी आया जैसे आदम में सब मरते थे वैसे ही में सब जलाए जाएंगे और यीशु मसीह ने तो स्वयं का इसलिए क्योंकि मैं जीवित हूं तो तुम भी जीवित रहोगे यैसे तो साफ साफ बाइबल में नहीं नहीं लिखा है कि ईस्टर दिन पुनरुत्थान दिन मनाना चाहिए लेकिन जो इसे मनाते हैं परमेश्वर का धन्यवाद द्वारा और परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं कि आपने हमारे लिए अपने पुत्र यीशु को भेजा और जिस प्रकार आपने उसे जिलाया वैसे ही आप हमें भी जिलाएंगे तब इस दिन का एक अलग ही मायना निकलता है यह यीशु ने कहा कि पुनरुत्थान और जीवन में ही हूं जो मुझ पर ईमान लाए यदि वह मर भी जाए तो भी वह जीवित रहेगा दोस्तों ईस्ट हमारे लिए मौका है प्रभु के पुनरुत्थान में मन फिर आकर से बागी होने का इसे अगर परमेश्वर की यादगार में मनाया जाए और अपनी आने वाली स्वर्गीय जिंदगी को ध्यान में रखते हुए मनाया जाए तो इसमें कोई भी बुराई नहीं हैl
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